Sunday, 26 October 2014
नज्म एक भूख है !!
नज्म एक भूख है
ये किताब नहीं चाहती
यह तो एक पैगाम है
जो सीधे दिल से निकलती है
और कवि ही उस नज्म का
चुनिंदा जोहरी है !!
नज्म मांगती है तो
वो चुनिंदा शब्द
उस सबधकोश से
जो दिल के तारो से जुडी है !!
एक-एक शब्द एक हिरा है
निकलता है तो सिर्फ
भावनाओ से भावनाओ को जोड़ने
भावनाए जो रिश्तो को जन्म देती है !!
कही कोई सूरज निकलता है
कही कोई चाँद बनकर बैठ जाता है
कही कोई कोपले अंकुरित होती है
तो कही एक बसेरा बन जाता है !!
एक जीवन को जन्म देती है , ये नज़्म
और ये नज़्म मुझे प्यारी है !!
दिग्विजय थापा
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