Friday, 2 March 2012

गीत नया गाता हूँ !!


(This poem has been inspired from former prime minister of India and a great poet Mr Atal Bihari Bajpayee)

गीत नया गाता हूँ

बिरक्त  बिछोड राहो  में 
खिसकते  सम्बन्ध  मिटाने 
झिलमिलाती  चांदनी  स्पर्स  लिए 
इन  शहरों  की  टूटी दीवारों  में 
गीत नया गाता हूँ !!

आक्रोश  की  ज्वाला  में 
इन  हस्त  से  लोह  को  पिघलाने 
बंजरो   की  धरती पे
नए  खलियानों को  खिलाने 
गीत नया गाता हूँ !!
  
पत्थरो   की  सतेह पर  
मोम  का  दिया  जलाने 
झूठे  आडम्बरी तम्रिस  में 
पुष्प  सुगंध  मन  सिर्जाने 
गीत नया गाता हूँ !!

झूठी  आशा   की  जमीं  पर 
नीर  का  अमृत  पिलाने 
राख  बनते  शरीर   को 
तपती  रूह  से  दहकाने 
गीत नया गाता हूँ !!
  
मेरे  अनुजो  की  चिताओं   पर 
शहीदों  की  सैलाब धुन पर     
कब्र मे बसी चीत्कार साँसों को  
निर्माण नव  इतिहास का दिखाने 
गीत नया गाता हूँ   !!

मेरे  अर्शु  की  चोट  पर 
समंदर कुबेर   का  बनाने 
उन  राष्ट्र-पिसाच दैत्यों  को 
भोग चंडी को एक चढाने 
गीत नया गाता हूँ !! 
गीत नया गाता हूँ !!

--  दिग्विजय थापा







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